उत्तराखंड

स्वर्ण समाज ने यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की

उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन, शिक्षा संस्थानों में जातीय भेदभाव खत्म करने की मांग

कलयुग दर्शन (24×7)

दीपक झा (संवाददाता)

हरिद्वार। स्वर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग को लेकर तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। इस दौरान समाज के लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर कानून के प्रति विरोध जताया। अजय शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार को सभी छात्र-छात्राओं के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग की, ताकि सभी छात्रों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। शमिक मिश्रा और सुबोध बंसल ने कहा कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचा रहे स्वर्ण समाज के लोगों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं निंदनीय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी कानून सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भेदभावपूर्ण नीति लागू नहीं करने की मांग की।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक और बालकृष्ण शास्त्री ने कहा कि सरकार को स्वर्ण समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार की दोहरी नीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस दौरान विकास अग्रवाल, सुबोध बंसल, रवि वर्मा, संजीव सिरोही, अमित सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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