उत्तराखंड

त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन स्वामी मोहनदास रामायणी: श्रीमहंत विष्णुदास

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर बाल योगी स्वामी मोहनदास रामायणी महाराज त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। भूपतवाला स्थित श्री सीताराम धाम में आश्रम के परमाध्यक्ष महंत सूरजदास महाराज के संयोजन में आयोजित गुरूजन श्रद्धा महोत्सव को संबोधित करते हुए श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि गुरूजनों के प्रति सच्ची निष्ठा और श्रद्धा ही शिष्य को उन्नति के मार्ग पर ले जाती है। सभी को महंत सूरजदास महाराज की उनकी गुरूजनों के प्रति श्रद्धा से प्रेरणा लेनी चाहिए। नगर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि धर्म संस्कृति और सेवा के लिए जीवन अर्पित करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी मोहनदास रामायणी उच्च कोटि के संत थे। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद व महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी मोहनदास रामायणी संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में उनका योगदान सभी के लिए प्रेरणादायी है।

बाबा हठयोगी व महंत रघुवीर दास ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी मोहनदास रामायणी महाराज विद्वान संत थे। उन्होंने कहा कि महंत सूरजदास जिस प्रकार अपने गुरू के अधूरे कार्यो को आगे बढ़ा रहे हैं। वह अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायी है। महंत सूरजदास महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि गुरू के रूप में उन्हें ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर बाल योगी स्वामी मोहनदास रामायणी जैसे प्रखर संत का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि गुरू के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए आश्रम की सेवा संस्कृति का विस्तार करना ही उनके जीवन का लक्ष्य है। इस अवसर पर महंत रघुवीर दास, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत बिहारी शरण, स्वामी विवेकानंद, महंत खेम सिंह, महंत दुर्गादास, महंत राजेंद्रदास, आईडी शास्त्री, महंत विनोद महाराज, महंत श्याम प्रकाश, महंत भोला गिरी, महंत राघवेंद्र दास, महंत हनुमान दास, स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, महंत प्रह्लाद दास, महंत नारायण दास पटवारी सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष शामिल हुए। ट्रस्टी गुप्ता परिवार व मधुर शर्मा ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।

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