श्री सुखदेव चरणदासीय धर्मशाला आश्रम मे गुरु पूर्णिमा पर्व, के अवसर पर महंत शीतलानंद महाराज ने अपने, तीन शिष्य बनाये

कलयुग दर्शन (24×7)
सागर कुमार (सह संपादक)
हरिद्वार। कनखल होली चौक मोहल्ले स्थित श्री सुखदेव चरणदासीय धर्मशाला, आश्रम के प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महत शीतलानंद जी महाराज ने गुरु शिष्य परंपरा का निर्वाहन करते हुए भविष्य में आश्रम की व्यवस्थाएं संचालित करने हेतु अपने तीन सेवाभावी शिष्यो स्वामी सुरेंद्रानंद महाराज स्वामी देवदास जी महाराज स्वामी उमेश्वरानंद जी महाराज को अपना उत्तराधिकारी शिष्य के रूप में उन्हें दीक्षा प्रदान करते हुए गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत उनके रहते आश्रम में की सेवा टहल करें तथा भविष्य में किसी प्रकार का कोई विवाद उत्पन्न ना हो इसलिए अपने तीन सेवाभावी शिष्यों को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ताकि उनके बाद आश्रम में किसी प्रकार का कोई विवाद उत्पन्न ना हो और तीनों शिष्य मिलकर आश्रम का संरक्षण करने के साथ-साथ उसे सही ढंग से संचालित कर सकें। इस अवसर पर परम पूज्य कथा व्यास श्री दिनेशानंद महाराज जो कि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी हैं। कहा आज आश्रम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रातः स्मरणीय परम पूज्य, श्री महंत शीतलानंद जी महाराज ने समय रहते एक बड़ा ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिससे हम सब ट्रस्टी तथा सेवक सहमत हैं किसी भी धर्मस्थल को चलाने हेतु, तथा गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करने हेतु एक गुरु को समय रहते अपने आश्रम धर्मस्थल की संचालन हेतु सुयोग्य शिष्यों का चयन करना पड़ता है।

इसी क्रम में महाराज श्री ने आज निर्णय लेते हुए अपने तीन सेवा भावी शिष्यों को गुरु दीक्षा देकर भविष्य के लिए अपना शिष्य मानते हुए उन्हें गुरु दीक्षा प्रदान की गुरु संसार में साक्षात परमात्मा का स्वरूप होते हैं। गुरु द्वारा दिखाया गया मार्ग सदैव कल्याणकारी होता है प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य श्री महंत शीतलानंद महाराज ने कहा गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा भक्ति और गुरु शिष्य का पावन पर्व है। इस संसार में मनुष्य के कल्याण और मुक्ति दोनों का मार्ग गुरु वचनों में छिपा है इसलिए जो गुरु की शरणागत हो गया उसका यह लोग तो सुधर ही जाता है। साथ-साथ परलोक भी सुधर जाता है गुरु मनुष्य के मन मस्तिष्क में ज्ञान का सृजन करता होते हैं और वही ज्ञान मनुष्य को उसके ज्ञान चक्षु खोलते हुए उसे उन्नति का मार्ग दिखाता है उसे सत्य का मार्ग दिखाता है उसे सही दिशा प्रदान करता है गुरु की शरण ही भवसागर की और जाने वाला मार्ग है।



