कुंभ मेला 2027 के लिए प्रशिक्षु पुलिस कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
डॉ. नरेश चौधरी ने पूर्व कुंभ मेलों की घटनाओं और व्यवस्थाओं की दी जानकारी

कलयुग दर्शन (24×7)
अमित वालिया (संवाददाता)
हरिद्वार। सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र हरिद्वार में कुंभ मेला प्रशिक्षण-2027 के अष्टम चरण के तहत प्रशिक्षु पुलिस कर्मियों को कुंभ एवं अर्द्धकुंभ मेले सहित सोमवती अमावस्या जैसे संवेदनशील स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं और चुनौतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन डॉ. नरेश चौधरी ने प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न विषयों का डिमॉन्स्ट्रेशन एवं व्याख्यान दिया। डॉ. चौधरी ने देश के चारों कुंभ स्थलों के इतिहास के साथ विभिन्न मेलों में पूर्व में हुई घटनाओं और उनसे मिली सीख के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घटना से मेला प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं को नई सीख मिलती है। पूर्व की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जांच आयोगों और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को आगामी कुंभ मेलों एवं संवेदनशील स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं में लागू करना आवश्यक है। उन्होंने 1986 हरिद्वार कुंभ, 1996 सोमवती स्नान पर्व, 2004 एवं 2010 कुंभ मेला तथा 2011 में शांतिकुंज द्वारा आयोजित शताब्दी मेले के दौरान हुई घटनाओं और जांच आयोगों के सुझावों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

साथ ही जिला एवं मेला प्रशासन के विभिन्न दायित्वों के निर्वहन में करीब चार दशकों के अपने अनुभव भी प्रशिक्षु पुलिस कर्मियों के साथ साझा किए। डॉ. चौधरी ने कहा कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों, कार्यदायी संस्थाओं, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, श्रद्धालुओं, मेला प्रशासन, जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सभी के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से पुलिस कर्मियों को सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी मिलता है। इससे वे मेले के दौरान आने वाली आकस्मिक परिस्थितियों और समस्याओं का तत्काल समाधान करने के लिए मानसिक रूप से भी तैयार होते हैं।



