एक लाख हस्ताक्षरों के साथ सचिवालय कूच, रिस्पना-बिन्दाल एलिवेटेड रोड निरस्त करने की मांग
बस्ती बचाओ आंदोलन के बैनर तले विशाल प्रदर्शन, मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन

कलयुग दर्शन (24×7)
विनय कुमार (संवाददाता)
देहरादून। रिस्पना–बिन्दाल एलिवेटेड रोड परियोजना को निरस्त करने तथा बस्तियों को मालिकाना हक देने की मांग को लेकर गुरुवार को सैकड़ों बस्तीवासियों ने राज्य सचिवालय पर विशाल प्रदर्शन किया। ‘बस्ती बचाओ आंदोलन’ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में एक लाख से अधिक हस्ताक्षरों के साथ मुख्य सचिव को ज्ञापन प्रेषित किया गया। प्रदर्शनकारी पहले गांधी पार्क में एकत्रित हुए, जहां सभा आयोजित की गई। इसके बाद रैली के रूप में सचिवालय पहुंचे और मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन उपजिलाधिकारी अपूर्वा सिंह को दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पूर्व में बस्तियों को मालिकाना हक देने का निर्णय लिया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि जिलाप्रशासन और नगर निगम ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और यह मुद्दा केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सभी बस्तीवासियों को मालिकाना हक देने की मांग दोहराई। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि जनता की असहमति के बावजूद एलिवेटेड रोड को मंजूरी देकर हजारों परिवारों को बेघर करने की तैयारी की जा रही है। नगर निगम द्वारा बिन्दाल क्षेत्र में 872 मकानों को तोड़ने की कार्रवाई चुने जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कुल 2883 प्रभावितों में से मात्र 376 को ही कानून सम्मत मुआवजा और पुनर्वास का पात्र बताया गया है, जबकि 2507 को सरकारी भूमि पर काबिज दर्शाया गया है। इसे प्रभावितों के साथ अन्याय बताया गया।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत केवल भूमिधर ही नहीं, बल्कि तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कब्जाधारी परिवार भी प्रभावित श्रेणी में आते हैं और पुनर्वास व प्रतिकर के हकदार हैं। ऐसे में सभी प्रभावितों को बाजार भाव से मुआवजा और समुचित पुनर्वास दिया जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने आशंका जताई कि एलिवेटेड रोड के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, नदी के प्रवाह में बाधा और पर्यावरणीय नुकसान होगा। साथ ही खाली कराई जा रही भूमि बाहरी कंपनियों को दिए जाने तथा स्थानीय रोजगार पर विपरीत प्रभाव पड़ने की बात भी कही गई। उन्होंने रिस्पना–बिन्दाल एलिवेटेड रोड परियोजना निरस्त करने तथा मुआवजा और पुनर्वास में भेदभाव समाप्त करने, सभी बस्तीवासियों को बिना भेदभाव मालिकाना हक देने व आपदा पीड़ितों को समुचित सहायता, टूटे मकानों का पुनर्निर्माण, नदियों की सफाई, तटबंध निर्माण और मलिन बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही कानून व्यवस्था के नाम पर उत्पीड़न रोकने और नशा माफियाओं पर अंकुश लगाने की मांग भी की गई। इस अवसर पर संयोजक अनंत आकाश, विप्लव अनंत, शौर्य चक्र, नरेंद्र, प्रेमा, किरन, अकरम, फरीदा, बिकाऊ यादव, इंदु नौडियाल, प्रमिला रावत, भगवानी देवी, हेमा रमोला, दीप्ति रावत, स्वाति नेगी, नवनीत गुसाईं, विकास रावत, चिंतन सकलानी, नुरैश अंसारी, एम.एस. रावत, मोहम्मद अल्ताफ, अदनान, शबनम, अंजली सेमवाल सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।
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