कंबोह का पुलः नॉनवेज होटलों की मनमानी से जनता बेहाल
आबादी वाले क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां, आखिर क्यों मौन है प्रशासन?

कलयुग दर्शन (24×7)
अबलीश कुमार (सहारनपुर संवाददाता)
सहारनपुर। शहर का हृदय स्थल माना जाने वाला कंबोह का पुल इलाका इन दिनों अवैध रूप से संचालित हो रहे नॉनवेज होटलों की मनमानी का केंद्र बन गया है। गर्मी के बीच सड़क पर जलती भट्टियां और गैस सिलेंडरों के जखीरे ने न केवल व्यापारी ही नही बल्कि आम ग्राहकों एवं सड़क पर चलने वालों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कंबोह के पुल पर दुकानदारों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि हर दो कदम पर खुले होटलों की भट्टियों से निकलने वाली गर्मी और धुएं के कारण दुकानों में बैठना मुश्किल हो गया है। इस दमघोंटू माहौल और गर्मी से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां
क्षेत्रीय जनता का तर्क है कि इस तरह के होटल, जो भारी मात्रा में आग और गैस का उपयोग करते हैं, उन्हें खुले और सुरक्षित स्थानों पर होना चाहिए। इस तरह के होटल भीड़भाड़ वाले इलाके में स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। स्थानीय लोगों की मांग है कि इस तरह के होटल आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खुले इलाकों में होने चाहिये जिससे राहगिरों व आस-पास के दुकानदारों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
अतिक्रमण और जाम से जनता बेहाल
होटल संचालकों द्वारा सड़क घेरे जाने और वहां आने वाले ग्राहकों की बेतरतीब पार्किंग के कारण कंबोह के पुल पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। हर दो कदम पर होटल होने के कारण पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बचती। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की आंखों के सामने हो रहे इस अतिक्रमण पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना बड़े सवाल खड़े करता है।

हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
कंबोह का पुल पहले ही अपने संकरे रास्ते के लिए जाना जाता है। होटलों द्वारा बाहर भट्टी रखकर रोटियां बनाने और सड़कों पर अवैध कब्जा करने से यहाँ दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि किसी सिलेंडर में विस्फोट हुआ या आग लगी, तो इस भीड़भाड़ वाले इलाके में जान-माल का इतना बड़ा नुकसान होगा जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।
खाकी की नाक के नीचे सड़क बनी रसोई
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस की गश्ती गाड़ियां इन रास्तों से रोजाना गुजरती हैं। पुलिसकर्मी अपनी आंखों के सामने सड़क पर हो रहे इस अवैध कब्जे और जोखिम भरे काम को देखते हैं, लेकिन होटल स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। पुलिस की यह चुप्पी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर किन कारणों से इन होटल संचालकों को खुली छूट दी जा रही है।



