उत्तराखंड

बहू ने निभाया श्रवण कुमार का धर्म, कांवड़ में बैठाकर सास को हरिद्वार से हापुड़ ले जा रही पिंकी

गंगा स्नान कराने के बाद शुरू की पैदल यात्रा, नन्ही बेटी राधा भी निभा रही सेवा का फर्ज

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से सेवा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी एक परिवार की बहू पिंकी अपनी वृद्ध सास ऊषा देवी को विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक पैदल यात्रा कर रही हैं। इस सेवा भाव से भरी यात्रा में उनकी नन्ही बेटी राधा भी अपनी दादी की देखभाल करते हुए पूरे उत्साह के साथ साथ चल रही है। बताया गया कि ऊषा देवी की लंबे समय से हरिद्वार आकर गंगा स्नान करने और कांवड़ यात्रा करने की इच्छा थी, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वह पैदल चलने में असमर्थ थीं। परिवार में चार पुत्र होने के बावजूद उनकी इस इच्छा को पूरा करने का संकल्प उनकी बहू पिंकी ने लिया। पिंकी सबसे पहले अपनी सास को हर की पैड़ी लेकर पहुंचीं, जहां उन्होंने उन्हें गंगा स्नान कराया। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में ऊषा देवी को बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक की पैदल यात्रा शुरू की। पूरी यात्रा के दौरान पिंकी स्वयं कंधों पर कांवड़ उठाकर अपनी सास को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।

पिंकी का कहना है कि सास की सेवा करना उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सौभाग्य की बात है। उनका मानना है कि जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चों के लिए जीवनभर त्याग करते हैं, उसी प्रकार बुजुर्गों की सेवा करना प्रत्येक संतान और परिवार का दायित्व है। इस यात्रा का एक और भावुक पहलू उनकी नन्ही बेटी राधा है। कम उम्र होने के बावजूद वह लगातार अपनी दादी का हालचाल पूछती रहती है और यात्रा के दौरान हर संभव सहायता करती है। राहगीर भी उसके संस्कार और सेवा भावना की सराहना कर रहे हैं। हरिद्वार से हापुड़ मार्ग पर जहां-जहां यह परिवार पहुंच रहा है, वहां श्रद्धालु और कांवड़िए रुककर उनके सेवा भाव को नमन कर रहे हैं। कई लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जबकि अनेक श्रद्धालु बहू पिंकी को “आधुनिक श्रवण कुमार” की संज्ञा देकर सम्मानित कर रहे हैं। यह अनोखी कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में सेवा, त्याग, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान की जीवंत मिसाल बन गई है। बहू पिंकी और नन्ही राधा ने अपने समर्पण से समाज को यह संदेश दिया है कि परिवार का सबसे बड़ा धर्म अपने बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा करना है।

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