श्रीमद्भागवत कलयुग की वैतरणी, श्रवण मात्र से होता है भवसागर से पार: स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार। श्री गीता विज्ञान आश्रम के तत्वावधान में राजा गार्डन स्थित श्री हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मंगलवार को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कलयुग की वैतरणी है, जिसका श्रद्धापूर्वक श्रवण करने मात्र से ही भक्त भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत को पंचम वेद का दर्जा प्राप्त है, जिसमें सभी धर्मग्रंथों का सार समाहित है।

यह कथा रूपी अमृत फल है, जिसमें सब कुछ ग्राह्य है और त्याज्य कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भक्त और भगवान के अटूट संबंध की कथा है। जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, उसका कल्याण निश्चित होता है। स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान के दरबार में न देर होती है और न ही अंधेर। भक्त को जिस रूप में भगवान की आवश्यकता होती है, वे उसी रूप में प्रकट होकर उसकी सहायता करते हैं। कथा शुभारंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से व्यास पीठ की आरती उतारी और विश्व शांति एवं मानव कल्याण की प्रार्थना की। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



