सनातन संस्कृति के संवाहक हैं अखाड़े और संत महापुरूष: श्रीमहंत डा रविंद्रपुरी

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सनातन विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। अखाड़े और संत महापुरूष सनातन संस्कृति के संवाहक हैं। निरंजनी अखाड़े में आचार्य प्रमोद कृष्णनम् एवं स्वामी ऋषिश्वरानंद के साथ धर्म संस्कृति पर चर्चा के दौरान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सनातन विश्व की सबसे प्राचीन और सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। पूरे विश्व के साथ बंधुत्व की भावना रखने वाले सनातन धर्म में भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अखाड़ों का गठन कर सनातन के संरक्षण संवर्द्धन का जो दायित्व सौंपा था। सभी अखाड़े निंरतर उस दायित्व का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सनातन पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है। लेकिन संत महापुरूषों की एकजुटता इसे कभी कामयाब नहीं होने देगी। इस दौरान श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने आचार्य प्रमोद कृष्णनम् को निरंजनी अखाड़े का जगद्गुरू बनाए जाने की घोषणा भी की।

आचार्य प्रमोद कृष्णनम् ने कहा कि समाज को सांस्कृतिक रूप से एकजुट करने में संतों ने हमेशा अहम भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से पूरे विश्व में सनातन का मान बढ़ा है। स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा कि संत महापुरूषों के प्रयासों से प्राचीन काल से ही भारत सांस्कृति एवं सामाजिक रूप से एकजुट रहा है। सनातन को ठेस पहुंचाने के किसी भी प्रयास को संत समाज कामयाब नहीं होने देगा। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरूण गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महंत दर्शन भारती, स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, स्वामी अनंतानंद, स्वामी रामानंूज सरस्वती, स्वामी सत्यप्रसाद, स्वामी सत्यश्रेय गिरी, साध्वी भगवती पुरी, महंत राज गिरी सहित कई संत महंत मौजूद रहे।



