‘मगध साइबर गैंग’ का ऋषिकेश नेटवर्क ध्वस्त, 18 फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला प्रमुख मददगार गिरफ्तार

कलयुग दर्शन (24×7)
सरविन्द्र कुमार (संवाददाता)
हरिद्वार। साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोतवाली श्यामपुर पुलिस और सीआईयू हरिद्वार की संयुक्त टीम ने ‘मगध साइबर गैंग’ के ऋषिकेश नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए गैंग के एक प्रमुख मददगार को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान सागर पाण्डेय पुत्र राधेराम पाण्डेय, मूल निवासी ग्राम सिकंदपुर, थाना सिकंदरपुर, जिला बलिया (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। वर्तमान में वह ऋषिकेश के मायाकुंड क्षेत्र में रह रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खातों यानी म्यूल अकाउंट्स की व्यवस्था करता था और इन्हें गैंग तक पहुंचाने के बदले मोटा कमीशन लेता था। पूछताछ में आरोपी ने विशाल और श्याम नामक व्यक्तियों के कुल 18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है। डिजिटल सुरागों ने पहुंचाया आरोपी तकवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह के निर्देश पर साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण में कोतवाली श्यामपुर पुलिस और सीआईयू हरिद्वार की विशेष टीम गठित की गई।कोतवाली श्यामपुर में दर्ज मुकदमें में वांछित चल रहे सागर पाण्डेय की तलाश के दौरान सीआईयू टीम ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उसकी लोकेशन चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड, ऋषिकेश में ट्रेस की।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर काले रंग की स्कूटी से जा रहे सागर पाण्डेय को गिरफ्तार कर लिया। बलिया से ऋषिकेश तक गैंग का कनेक्शनपूछताछ में पुलिस को पता चला कि सागर पाण्डेय मूल रूप से बलिया का रहने वाला है और ऋषिकेश में रहकर ‘मगध साइबर गैंग’ के पूर्व में गिरफ्तार मुख्य सरगना कृष्णा पाण्डेय के संपर्क में था।आरोप है कि वह स्थानीय लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगी से हासिल रकम के लेनदेन के लिए गैंग को उपलब्ध कराया जाता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने ऐसे 18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराने की बात कबूल की है। साथियों की गिरफ्तारी के बाद डिलीट कर दिए चैट और नंबरपुलिस पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि जब उसे जानकारी मिली कि उसके पांच साथी पुलिस के हत्थे चढ़कर जेल जा चुके हैं, तो वह घबरा गया। पुलिस से बचने के लिए उसने अपने मोबाइल से व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और साथियों के मोबाइल नंबर डिलीट कर दिए। हालांकि, तकनीकी जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे। आरोपी के मोबाइल की गैलरी से विशाल के नाम दर्ज बैंक खाते की फोटो बरामद की गई, जिसे पुलिस ने साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया है। मोबाइल समेत डिजिटल दस्तावेज बरामदपुलिस ने आरोपित के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया है। इसके अलावा बैंक खातों और चौट से संबंधित रिकवर्ड डिजिटल दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस की तकनीकी टीम डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने में जुटी है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ विधिक कार्यवाही करते हुए उसका चालान कर दिया है।



