उत्तराखंड

अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल में दोफाड़ की स्थिति

वैष्णव संतों के एक गुट ने महंत दुर्गादास को अध्यक्ष घोषित किया

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। बृहष्पतिवार को हुए श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद मंडल में दो फाड़ की स्थिति बन गयी है। वैष्णव संतों के एक गुट ने बैठक कर चुनाव निष्पक्ष नहीं होने का आरोप लगाते हुए विेजेता घोषित किए गए बाबा हठयोगी को अध्यक्ष मानने से इंकार करते हुए चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे महंत दुर्गादास को श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल का अध्यक्ष घोषित कर दिया है। वाल्मीकि चौक के समीप सुदर्शन अखाड़ा में महंत रघुवीर दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्व अध्यक्ष महंत नारायण दास पटवारी ने कहा कि श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल की पूर्व में हुई बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष महंत बलराम दास ने पद से त्यागपत्र दे दिया था और व्यवस्था को भंग करते हुए दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बृहष्पतिवार को श्रवणनाथ स्थित रामानंद आश्रम में हुआ चुनाव नियमों के अनुसार नहीं हुआ। बाहरी लोग भी चुनाव के दौरान मौजूद थे।

चुनाव के दौरान संतों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और बाहर निकाल दिया गया। बाहर निकाले जाने पर रोष व्यक्त करते हुए बड़ी संख्या में संतों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया। महंत नारायण दास पटवारी ने कहा कि संतों का बहुमत महंत दुर्गादास के साथ है। इसलिए सभी ने बैठक कर महंत दुर्गादास को अध्यक्ष घोषित कर दिया है। बैठक में मौजूद रहे महंत प्रहलाद दास, महंत सूरज दास, महंत हरेंद्र दास, महंत जयराम दास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत गोविंददास, महंत मुरारी शरण, महंत परमेश्वर दास, महंत जगदीश दास, महंत प्रभु दास, महंत जगदीश दास, महंत कन्हैया दास, महंत अंकित शरण आदि ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों और अन्य संतों को भी अवसर मिलना चाहिए।

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