उत्तराखंड

महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

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दीपक कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने जूना अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर अखाड़े और सनातन परम्परा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 30 नवंबर को जूना अखाड़े ने एक पत्र जारी कर उन्हें और उनके गुरु को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने निष्कासन के आरोपों का जवाब एक करोड़ की मानहानि के साथ अधिवक्ता के माध्यम से अखाड़े के पदाधिकारियों को भेजा था। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अखाड़े द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा और अखाड़े की सदस्यता नहीं ली। वर्ष 2007 में प्रयागराज में संतों द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2021 में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और इस प्रक्रिया को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता। ना ही किसी को उन्हें निष्कासित करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने के नाम पर लाखों रूपए की धनराशि ली जाती है। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने यह आरोप भी लगाया कि कुंभ मेले में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से नागा साधु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उन्होंने विरोध किया है।

फर्जी नागा के रूप में उन्होंने अपनी ही संस्था हिन्दू रक्षा सेना के लोगों को पकड़ा है। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरी, श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत प्रेम गिरी और श्रीमहंत नारायण गिरी पर आरोप लगाते हुए उनका पंक्ति पत्तल वहिष्कार किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि वह इन चारों को अपने यहां पंक्ति में नहीं बुलाएंगे और न ही उनके यहां जाएंगे। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने श्रीमहंत हरि गिरी से अखाड़े की आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए जिस व्यक्ति को फर्जी संत और कालनेमि बताकर पूर्व में जिसका निष्कासन किया गया था। अखाड़े के पदाधिकारी आज उसी को जगद्गुरु बना रहे हैं। जबकि उन्हें जगद्गुरु बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है। उन्होंने अखाड़े के पदाधिकारियों पर इस्लामिक जेहादियों से सांठगांठ का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी हत्या करायी जा सकती है। केंद्र सरकार से संबंधित लोगों की संपत्ति और गतिविधियों की विशेष जांच एजेंसी से जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित मांग करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि वह जीवन भर सनातन धर्म, गौसेवा और संतों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे तथा देशभर में धर्म जागरण के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे। प्रैसवार्ता के दौरान स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती, स्वामी ओमानंद, प्रकाशानंद सरस्वती, वीरेन्द्र स्वरूप, प्रज्ञानंद गिरि, लक्की वर्मा, अमित वर्मा व लक्की राठौर आदि मौजूद रहे।

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