उत्तराखंड

जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं भगवान शिव: स्वामी कैलाशानंद गिरी

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। श्री दक्षिण काली मंदिर में आयोजित निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की विशेष शिव साधना पांचवे दिन भारी जारी रही। पूरे सावन चलने वाली शिव साधना में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। श्रद्धालुओं को शिव महिमा से अवगत कराते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष के प्रभाव से संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष का प्रभाव दूर करने के लिए देवताओं ने गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद से ही जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई।

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि भगवान शिव बेहद दयालु हैं। केवल जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को सावन में शिव आराधना करनी चाहिए। प्रतिदिन गंगा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करें। जलाभिषेक के दौरान ओम नमःशिवाय मंत्र का जाप करते रहें। सावन में की गयी शिव आराधना से जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं। प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। इस दौरान स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, स्वामी कृष्णानंद ब्रह्मचारी, स्वामी बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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