रीढ़ की समस्याओं के चेतावनी संकेत जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

कलयुग दर्शन (24×7)
हैदर अंसारी (सहारनपुर जिला प्रभारी)
सोनीपत। अक्सर रीढ़ (स्पाइन) से जुड़ी समस्याएं हल्के दर्द या असहजता से शुरू होती हैं जिन्हें लोग सामान्य थकान,गलत बैठने की आदत या रोजमर्रा के तनाव का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन लगातार रहने वाला पीठ या गर्दन का दर्द,हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर स्पाइनल समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं समय रहते इन संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है क्योंकि शुरुआती जांच और इलाज लंबे समय की जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकते हैं स्पाइन की समस्याओं को अक्सर इसलिए अनदेखा किया जाता है क्योंकि शुरुआती लक्षण मामूली लगते हैं कई लोग हल्के दर्द को उम्र, गलत पॉश्चर या थकान से जोड़ देते हैं आराम करने या दर्द कम करने वाली दवाओं से अस्थायी राहत मिलने पर लोग डॉक्टर से सलाह लेने में देर कर देते हैं जिससे अंदरूनी समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है और इलाज अधिक जटिल बन सकता है मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल,शालीमार बाग के ऑर्थो स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड डॉ. जितेश मंघवानी ने बताया “रीढ़ की समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं लंबे समय तक बैठकर काम करना या स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल खराब पॉश्चर का कारण बन सकता है बढ़ती उम्र के साथ स्पाइनल डिस्क में घिसाव होना सामान्य है दुर्घटना, चोट, गिरना, स्लिप डिस्क, डिस्क का खराब होना, व्यायाम की कमी और मोटापा भी स्पाइन संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ाते हैं।

इन कारणों को समझकर शुरुआती स्तर पर बचाव और बेहतर प्रबंधन संभव है कुछ ऐसे चेतावनी संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए यदि पीठ या गर्दन का दर्द कई हफ्तों तक बना रहे, हाथों-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस हो, अंगों में कमजोरी के कारण सामान उठाने में दिक्कत हो, दर्द हाथों या पैरों तक फैलने लगे, चलने या संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो या मूत्र एवं मल नियंत्रण में कमी आए तो यह गंभीर स्पाइनल समस्या या नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है विशेष रूप से ब्लैडर या बाउल कंट्रोल का नुकसान मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है जिसके लिए तुरंत इलाज जरूरी है डॉ.जितेश ने आगे बताया कुछ परिस्थितियों में तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए जैसे अचानक या बहुत तेज पीठ दर्द,हाथों या पैरों में अचानक कमजोरी,चलने में कठिनाई,शरीर के समन्वय में समस्या,लगातार बढ़ता सुन्नपन या ब्लैडर-बाउल कंट्रोल में बदलाव ये संकेत गंभीर स्पाइनल स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं जिनमें तत्काल उपचार आवश्यक होता है। स्पाइन समस्याओं की सही पहचान के लिए शारीरिक जांच, न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन, एमआरआई, एक्स-रे और कुछ मामलों में सीटी स्कैन किए जाते हैं ये जांच डिस्क की समस्या, नसों पर दबाव या अन्य कारणों का पता लगाने में मदद करती हैं स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए सही पॉश्चर बनाए रखना नियमित व्यायाम और स्ट्रेचिंग करना, एर्गोनोमिक फर्नीचर का उपयोग, स्वस्थ वजन बनाए रखना और लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से बचना जरूरी है छोटी-छोटी जीवनशैली आदतों में बदलाव स्पाइन समस्याओं के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं स्पाइन संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है, स्थायी नसों की क्षति का जोखिम कम होता है, इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं और सर्जरी की संभावना घट सकती है।



