परमात्मा का ही स्वरूप हैं गुरू: स्वामी ऋषि रामकृष्ण

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। निर्धन निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि गुरू परमात्मा का ही दूसरा स्वरूप हैं। गुरू बढ़कर संसार में कुछ नहीं है। गुरू पूर्णिमा के अवसर पर आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि गुरू ही शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर उसका जीवन भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को अपने गुरूजनों का सदैव आदर सम्मान करना चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा निरंतर बहने वाली ज्ञान की गंगा है। अपने गुरूजनों की स्मृति में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कर स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने सराहनीय कार्य किया है। इससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

बाबा हठयोगी एवं महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने कहा कि मानव कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान कर रहे स्वामी ऋषि रामकृष्ण द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन सभी के लिए कल्याणकारी होगा। इस अवसर पर संत परंपराओं को आगे बढ़ाने में महामंडलेश्वर रामानुज सरस्वती के योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र बंसल ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, महंत मोहन सिंह, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी अनंतानंद, स्वामी हरिहरानंद, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी शिवानंद भारती, महंत सूरज दास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत शुभम गिरी सहित अनेक संत महंत औहर श्रद्धालु मौजूद रहे।



