उत्तराखंड

केवल गुरु का सम्मान करने का नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने का दिन भी है गुरू पूर्णिमा: स्वामी कैलाशानंद गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)

राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि गुरू पूर्णिमा केवल गुरु का सम्मान करने का नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने का दिन भी है। श्री दक्षिण काली मंदिर में आयोजित गुरू पूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का अर्थ केवल शिक्षक नहीं है। शिक्षक ज्ञान दे सकता है, लेकिन गुरु शिष्य के जीवन को दिशा देते हैं। उसे अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान की और ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है।

जब तक गुरु की कृपा प्राप्त नहीं होती, तब तक कोई भी मनुष्य अज्ञान रूपी अधंकार में भटकता हुआ माया मोह के बंधनों में बंधा रहता है, उसे मोक्ष नहीं मिलता। गुरु के बिना उसे सत्य और असत्य के भेद का पता नहीं चलता, उचित और अनुचित का ज्ञान नहीं होता। गुरु से प्राप्त शिक्षा जीवन की दिशा बदल देती है तथा हमारे भीतर की तमाम बुराईयों को खत्म कर जीवन को उन्नति की ओर ले जाती है। इस अवसर पर स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी बालमुकुंद ब्रह्मचारी, पंडित पवनदत्त मिश्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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