यज्ञ के प्रभाव से दूर होती है नकारात्मकता: स्वामी माधवाचार्य
यज्ञ के प्रभाव से विश्व शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा: स्वामी अयोध्याचार्य

कलयुग दर्शन (24×7)
सागर कुमार (सह संपादक)
हरिद्वार। स्वामी माधवाचार्य महाराज ने कहा कि वैदिक संस्कृति में किए जाने वाले हवन यज्ञ का विशेष महत्व है। सप्तऋषि स्थित ए.एन.डी. पब्लिक स्कूल में आयोजित विशेष हवन यज्ञ के समापन पर संत समागम की अध्यक्षता करते हुए मंगला पीठाधीश्वर स्वामी माधवाचार्य महाराज ने कहा कि संत समाज सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाने में निरंतर योगदान कर रहा है। प्राचीन काल में ऋषि मुनियों ने यज्ञ परंपरा की शुरूआत की थी। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किए जाने वाले यज्ञ के प्रभाव से समस्त नकारात्मकता दूर हो जाती है और सकारात्मकता का उदय होता है। जिससे कल्याण और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि सभी को यज्ञ अवश्य करना चाहिए। यदि प्रतिदिन ना कर सकें तो विशेष अवसरों पर यज्ञ अवश्य करें। जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा ने कहा कि प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा प्रतिपादित यज्ञ की परम्परा का पालन करते हुए किए गए यज्ञ के प्रभाव से अवश्य ही विश्व शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। श्रीमहंत विष्णुदास एवं बाबा हठयोगी ने कहा कि परमार्थ के लिए जीवन समर्पित करने वाले संत महापुरूषों के सानिध्य में गंगा तट पर किए गए धार्मिक क्रियाकलाप का सहस्त्रों गुणा पुण्य फल प्राप्त समस्त मानव जाति को प्राप्त होता है।

महंत राजेंद्रदास, साध्वी वैष्णवी, साध्वी जयश्री एवं स्कूल की प्रिंसीपल साध्वी विजय लक्ष्मी ने सभी संत महापुरूषों का स्वागत किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर महंत जगदीश दास, महामंडलेश्वर महंत हरिओम दास, महामंडलेश्वर महंत रामकृष्ण दास, महंत राधेबाबा, महामंडलेश्वर महंत भक्ति दास, महंत काशी दास, महंत विशम्भर दास, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत अंकित शरण, महंत राजेंद्र दास, महंत विष्णुदास, महंत गोविंददास, महंत प्रेमदास, स्वामी शिवानन्द भारती, महंत राघवेंद्र दास, बाबा हठयोगी, महंत जसविन्दर सिंह, महंत निर्भय सिंह, स्वामी अनन्तानन्द, महंत जयराम दास, स्वामी शिवम महंत, महंत सूरज दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी हरिहरांनद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी प्रमोद दास, महंत प्रेमदास, भक्त दुर्गादास, महंत हरिदास, स्वामी ऋषिश्वरानन्द, महंत प्रह्लाद दास, महंत दुर्गादास, सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष व श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।



