मुनीम को कोठारी बनाए जाने पर संतों ने जताया कड़ा एतराज
अखाड़े के नियमों और संत परंपरा के खिलाफ लिए गए निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा: महंत छोटूराम

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुनीम को कोठारी नियुक्त किए जाने पर अखाड़े के संतों ने कड़ा एतराज जताया है। संतों ने इस निर्णय को अखाड़े के नियमों और संत परंपरा के विपरीत बताते हुए अखाड़ा परिषद सहित प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। पंजाब से आए श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत छोटूराम महाराज ने भूपतवाला स्थित बाबा बीरम दास गद्दी से जारी बयान में कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि महंत भगतराम द्वारा अखाड़े के मुनीम को कोठारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अखाड़े के नियमों के अनुसार किसी गृहस्थ को इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। महंत छोटूराम ने आरोप लगाया कि यह निर्णय अखाड़े के नियमों और संत परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा किसी की निजी संपत्ति नहीं है, इसलिए कर्मचारी को कोठारी बनाए जाने जैसे एकतरफा निर्णय स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महंत भगतराम पर अखाड़े की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का आरोप भी लगाया। महंत छोटूराम ने कहा कि अखाड़े के संत-महंत नियमों के विपरीत लिए गए किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि जल्द ही अखाड़े के संतों की बैठक बुलाकर मामले पर विचार-विमर्श किया जाएगा और इसके बाद अखिल अखाड़ा परिषद के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

साथ ही संतों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग करेगा। वृंदावन से आए फलाहारी बाबा ने कहा कि अखाड़ों का गठन धर्म की रक्षा के लिए हुआ है और उनके संचालन के लिए नियम निर्धारित हैं। किसी को संत बनाए जाने का निर्णय अखाड़े के पंच परमेश्वर, महंत, कोठारी और कारोबारी मिलकर करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में इन नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म और अखाड़े के नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्णय का संत-महंत जल्द निर्णय करेंगे। कार सेवा वाले बीरम दास गद्दी के महंत बाबा बेअंत दास महाराज ने कहा कि अखाड़े का गठन धर्म और संतों की रक्षा के लिए हुआ है। अखाड़े का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। इस दौरान सचिव गणेश दास महाराज, अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव प्रकाश, बाबा गंगराम, बाबा हरि प्रकाश, बाबा भरपूर दास, बाबा शिवानंद और बाबा दयाल दास सहित अन्य संत



