जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है महारास: श्रीमहंत साधनानंद

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित झालावाड़ आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्तों को श्रीकृष्ण रूक्मणि विवाह, महारास लीला, कृष्ण सुदामा मित्रता आदि विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कराते हुुए कथाव्यास श्रीमहंत साधनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन और श्रवण दोनों पुण्यदायी है। गंगा तट पर संत महापुरूषों के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाए तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने महारास जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है। महारास में गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के प्राण हैं। जो व्यक्ति भक्ति भाव से पंच गीत गाता है।

भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से उसका लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं। श्रीमहंत साधनानंद महाराज ने कहा कि सभी को अपने घर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करना चाहिए। इससे घर का वातावरण पवित्र होता है और सकरात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर के सदस्यों में आपसी स्नेह, शांति और आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है। पितरों को भी शांति मिलती है और परिवार पर ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है। स्वामी महादेवानंद, महंत परमेश्वर दास ने भी श्रद्धालु भक्तों को आशीवर्चन प्रदान किए। कथा के मुख्य यजमान मधुबेन जोशी व हितेश भाई जोशी ने व्यास पीठ का पूजन किया और संतों का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।



