उत्तराखंड

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के संतों ने मुखिया महंत पर लगाया अखाड़े की संपत्ति को खुर्दबुर्द करने का आरोप

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के संतों ने मुखिया महंत दुर्गादास पर पावर ऑफ अटार्नी के माध्यय से अखाड़े की संपत्ति को खुर्दबुर्द करने और अखाड़े के मुकामियों व महंतों को धोखा देने का आरोप लगाया है। भूपतवाला स्थित आश्रम में जानकारी देते हुए महंत रमन मुनि ने बताया कि अखाड़ा किसी एक व्यक्ति की बपौती नहीं है। अखाड़े के पंच परमेश्वर, निर्माण मंडल एवं स्थानीय महंतों की खुली बैठक में ही सभी निर्णय लिए जाते हैं। लेकिन मुखिया महंत दुर्गादास ने पंच परमेश्वर, निर्वाण मंडल और महंतों को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लेते हुए एक अधिवक्ता के पक्ष में पावर ऑफ अटार्नी कर दी है। जबकि उन्हें इस प्रकार का निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। अखाड़े की परंपरांओं को दरकिनार कर लिए गए इतने बड़े और एकतरफा निर्णय के बावजूद सभी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्ति मुखिया महंत दुर्गादास की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। अखाड़ा पंजाब की विरासत है। श्री गुरू नानक देव महाराज के बड़े साहबजादे आचार्य जगतगुरू श्री श्रीचंद्र भगवान की परंपरा को समर्पित, राजा महाराजाओं, जमीदारों, व्यवसायियों एवं आम जनता द्वारा समर्पित अखाड़े की संपत्ति पांच सौ साल पुरानी है।

जिसे खुर्दबुर्द होने से बचाने के लिए अखाड़े के सभी संतों को आगे आना होगा। महंत प्रज्ञान मुनि ने कहा कि मुखिया महंत दुर्गादास के उदासीन परंपरा एवं अखाड़े की मर्यादा के विपरीत आचरण, व्यवहार और उनकी दिनचर्या को देखते हुए अखाड़े का कोई संत उन्हें मुखिया महंत बनाने के लिए तैयार नहीं था। अब उनका पूरी तरह पर्दाफाश हो चुका है। महंत प्रज्ञान मुनि ने अखाड़े की संपत्ति बचाने के लिए संतों से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि हरिद्वार में कंबल बिछाने की कार्यवाही करते हुए अखाड़े की संपत्ति खुर्दबुर्द किए जाने की सुनवाई की जाए और मुखिया महंत दुर्गादास के खिलाफ मुकद्मा दर्ज कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि अब भी अखाड़े के संत महंत आगे नहीं आते हैं, तो उन्हें भी अखाड़े के अनुयायियों और अखाड़े को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे संतों को जवाब देना होगा।

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