उत्तराखंड

अमेरिकन आश्रम की संपत्ति को लेकर विवाद गहराया

बाबा हठयोगी ने प्रबंधक परमजीत कौर पर लगाए गंभीर आरोप, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। अमेरिकन आश्रम की संपत्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्वयं को ट्रस्ट का अध्यक्ष बताने वाले बाबा हठयोगी ने आश्रम की प्रबंधक परमजीत कौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने की कथित साजिश का दावा किया है। बाबा हठयोगी ने स्वामी रामविशाल दास और अन्य संतों के साथ मीडिया से बातचीत में मामले में कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। बाबा हठयोगी ने आरोप लगाया कि आश्रम के नाम पर कथित रूप से फर्जी ट्रस्ट बनाकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और जमीन बेचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस ट्रस्ट में जमीन संबंधी विवाद में आरोपी बताए जा रहे सोलंकी और परमजीत कौर के परिजनों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने परमजीत कौर पर आश्रम परिसर में रेस्टोरेंट खोलने का भी आरोप लगाया। बाबा हठयोगी और स्वामी रामविशाल दास ने आरोप लगाया कि आश्रम की तीन बीघा भूमि बिल्डर अजय कुमार को दी गई है। बाबा हठयोगी का कहना है कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की संपत्ति के संबंध में मनमाने फैसले लेकर निजी हित साधने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा के लिए वह हरसंभव कदम उठाएंगे।

अध्यक्ष बनाए जाने का किया दावा
बाबा हठयोगी ने दावा किया कि मैडम ईस्टर फ्रीड ने स्वयं आग्रह कर उन्हें ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया था, ताकि आश्रम की भूमि की सुरक्षा की जा सके। उन्होंने बताया कि वह ट्रस्ट के सचिव भी हैं और ट्रस्ट में कुल सात सदस्य हैं। उनके अनुसार, बहुमत के बिना ट्रस्ट में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बताया।

मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी
बाबा हठयोगी ने आरोप लगाया कि परमजीत कौर मैडम ईस्टर फ्रीड को भ्रमित कर मनमाने निर्णय ले रही हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के कथित प्रयासों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि आश्रम की जमीन पर भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की नजर है। बाबा हठयोगी ने कहा कि आश्रम की भूमि का इस्तेमाल निजी हितों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यदि संपत्ति का उपयोग सार्वजनिक हित में नहीं किया जाता है, तो उसे सरकार में निहित कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नोट: संपत्ति और ट्रस्ट से संबंधित आरोप बाबा हठयोगी एवं उनके साथ मौजूद संतों के बयानों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है।

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