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महंत शीतल दास जी महाराज पंचतत्व में विलीन, अरवेन्द्र दास व महेश मुनि बने पीठाधीश्वर

कलयुग दर्शन (24×7)

संदीप कुमार (संवाददाता)

हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की संगरिया तहसील स्थित ऐतिहासिक भैरों मंदिर (श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन) में परम पूज्य श्री महंत 1008 शीतल दास जी महाराज के पंचतत्व में विलीन होने पर उदासीन संप्रदाय के संतों, अखाड़ा प्रतिनिधियों और धर्मप्रेमियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महाराज के देवलोकगमन से संत समाज में शोक की लहर है। परंपराओं एवं शास्त्रीय मर्यादाओं का पालन करते हुए मंदिर परिसर में महंत श्री अरवेन्द्र दास जी एवं श्री महंत महेश मुनि जी की शुभ चादर-महंती और गद्दीनशीनी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर दोनों संतों को पीठाधीश्वर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के महंत पंच परमेश्वर श्री सत मुनि जी के सानिध्य में आयोजित समारोह में देश के विभिन्न तीर्थों और अखाड़ों से आए संत-महात्माओं ने भाग लिया।

इनमें कनखल के कोठारी महंत श्री राघवेंद्र राज जी, शाहपुर शीतला बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी श्री सूर्यांस मुनि जी, श्री दिनेश मुनि जी (कनखल), श्री अरविन्द दास जी (नासिक) तथा मतौली अखाड़े के महंत श्री केवलानंद जी सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। संत समाज ने महंत 1008 शीतल दास जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक सेवाओं का स्मरण किया। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की कि महाराज की आत्मा को श्रीचरणों में स्थान मिले और नव नियुक्त पीठाधीश्वरों के मार्गदर्शन में मंदिर एवं अखाड़े की धार्मिक परंपराएं निरंतर आगे बढ़ती रहें।

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