उत्तराखंड

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन पंजाब के संतों ने दिया अखाड़ा परिषद को ज्ञापन

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दीपक झा (संवाददाता)

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन पंजाब के जनरल सेक्रेटरी महंत गणेश दास के नेतृत्व में आए अखाड़े के प्रतिनिधि मंडल ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज तथा राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरी गिरी महाराज को ज्ञापन दिया और अखाड़ा परिषद से अपना निष्कासन समाप्त किए जाने की मांग की है। साथ ही श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी और श्रीमहंत हरी गिरी के नेतृत्व वाले अखाड़ा परिषद को समर्थन देने की घोषणा की। जूना अखाड़ा स्थित मायादेवी मंदिर में अखाड़ा परिषद पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के दौरान महंत गणेश दास ने कहा कि 2016 के प्रयागराज कुंभ में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के तत्कालीन पदाधिकारियों महंत जगतार मुनि, महंत धूनीदास, महंत भगतराम, महंत त्रिवेणी दास आदि ने तत्कालीन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी को गुमराह करके उन्हें अखाड़ा परिषद से निष्कासित करा दिया था। तब से आज तक कुंभ मेला शाही स्नानो में अखाड़े के देवताओं का लगातार अपमान किया जा रहा है। जिसके बारे में अखाड़ा परिषद को पहले भी कई बार अवगत कराया जा चुका है।

महंत गणेश दास ने अखाड़े की संपत्ति पर कब्जा कर अवैध रूप से बेचने का आरोप लगाते हुए अखाड़े की व्यवस्थाओं को देखने के लिए पंजाब के जालंधर जिले में एक जनरल कमेटी पंजीकृत है। जोकि भ्रमणशील जमात मंडल के मुखिया महंतों के कार्यकलापों पर नियंत्रण रखती है। लेकिन उनके निष्कासन के पश्चात उपरोक्त पदाधिकारियों ने जनरल कमेटी की मीटिंग में आना बंद कर दिया और ना ही उनके चुनाव करवा रहे है। जबकि नियमानुसार कमेटी का निर्वाचन और पंजीकरण का नवीनीकरण लगातार कराया जाता रहा है। साधारण सभा के कई बार आग्रह के बावजूद चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल ने मांग की है कि अखाड़ा परिषद की देखरेख में जनरल कमेटी के पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाए तथा उनका निष्कासन समाप्त किया जाए। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी तथा महामंत्री श्रीमहंत हरी गिरि ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया है कि अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाकर पूरे प्रकरण की गहराई से छानबीन करने के साथ सभी तथ्यों पर विचार कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में श्रीमहंत भगवान दास, बाबा भरपूर दास, महंत गणेश दास, महंत सुखदेव प्रकाश सहित कई संत महंत शामिल रहे।

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