ज्ञान का सागर है श्रीमद्भागवत कथा: स्वामी हरिचेतनानंद

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राकेश वालिया (संवाददाता)
हरिद्वार। कथाव्यास महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का सागर है। कथा के प्रत्येक सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है। खड़खड़ी स्थित निर्धन निकेतन आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पूतना वध, माखन चोरी, गोवर्धन पूजा आदि प्रसंगों का वर्णन करते हुए कथाव्यास स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भक्त और भगवान की कथा है। कथा से मिले ज्ञान को हृदय में आत्मसात करने से श्रीहरि की अनंत कृपा प्राप्त होती है। जिससे जीवन सहज, सरल और आनन्दमय हो जाता है।

निर्धन निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्त की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। भगवान के प्रति सच्ची भक्ति से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का मूल मंत्र धर्म और सदाचार है। जो व्यक्ति धर्म और सदाचार के मार्ग का अनुसरण करते हैं। उन पर श्रीहरि सदैव कृपा करते हैं। कथा के दौरान राधा कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र बंसल सहित सभी श्रद्धालु भक्तों ने भागवत पूजन कर कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया।



