भक्त की पुकार पर दौड़े चले आते हैं भगवान: स्वामी रविदेव शास्त्री
गरीबदासीय आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। रेलवे रोड़ स्थित गरीबदासीय आश्रम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज की सातवीं पुण्यतिथी पर उनकी स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का वर्णन करते हुए कथाव्यास स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की पुकार पर दौड़ चले आते हैं। सुदामा भगवान कृष्ण के परम् भक्त और ज्ञानी ब्राह्मण थे। अत्यंत गरीबी में दिन गुजार रहे सुदामा भगवान की भक्ति की लीन में रहते हैं, लेकिन उनसे कुछ मांगते नहीं हैं। एक दिन पत्नी सुशीला के कहने पर सुदामा पोटली में कुछ चावल लेकर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। श्रीकृष्ण को जब सुदामा के आने का समाचार मिला तो वे नंगे पैर दौड़े आए और सुदामा को हृदय से लगा लिया। द्वारका में सेवा सत्कार के बाद उन्होंने सुदामा को विदा किया और बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ दे दिया। लेकिन सुदामा ने अपनी सादगी नहीं छोड़ी और हमेशा भगवान का स्मरण करते रहे।

स्वामी रविदेव शास्त्री ने श्रद्धालु भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा का सार समझाते हुए कहा कि कथा परम् कल्याणकारी है। कथा के प्रभाव से मृत्यु का भय भी दूर हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि जब राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप मिला तो वे समस्त राजपाट छोड़कर गंगा तट पर बैठ गए। जहां शुकदेव मुनि ने उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय दूर हो गया और उन्हें परम्धाम की प्राप्ति हुई। स्वामी निर्मलदास, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी शिवम महाराज, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी ज्योर्तिमयानंद ने भी श्रद्धालु भक्तों को संबोधित किया। मुख्य यजमान रश्मि बेन एवं नवीन चन्द्र भट्ट ने व्यासपीठ का पूजन किया और फूलमाला पहनाकर सभी संत महापुरूषों का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर संजय वर्मा, पंडित पदम प्रसाद सुवेदी, लोकनाथ सुवेदी, शेखर वर्मा, आश्रम के ट्रस्टी व श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।



