उत्तराखंड

राष्ट्र की एकता अखंडता कायम करने में संत महापुरूषों की अहम भूमिका: महंत बलवंत सिंह

हिंदू समाज के आधार स्तंभ हैं संत महापुरूष: किरण जैसल

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर कनखल स्थित सुखदेव कुटी में संत समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान संत समाज ने संत पवन सिंधी के अवतरण दिवस पर उन्हें आशीर्वाद और शुभकामनाएं प्रदान करते हुए मां गंगा से उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज और अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी ने संदेश प्रेषित कर संत पवन सिंधी को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दी। संत समागम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत बलवंत सिंह ने कहा कि समाज को सांस्कृतिक रूप से एकजुट कर राष्ट्र की एकता अखंडता कायम करने में संत महापुरूषों ने हमेशा ही अहम भूमिका निभायी है। महंत बलवंत सिंह ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है। अखाड़े और संत महापुरूष सनातन संस्कृति के संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि परमार्थ के लिए जीवन समर्पित करने वाले संत महापुरूषों के सानिध्य में प्राप्त ज्ञान से भक्त के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।

मेयर किरण जैसल ने कहा कि संत महापुरूष हिंदू समाज के आधार स्तंभ हैं। सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने में महंत बलवंत सिंह अहम योगदान कर रहे हैं। स्वामी ऋषिश्वरानंद और बाबा हठयोगी ने कहा कि महंत बलवंत सिंह त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति हैं। उनके त्यागमयी जीवन से भक्तों को मानव कल्याण की प्रेरणा मिलती है। महंत गोविंददास एवं महंत दामोदर शरण महाराज ने कहा कि जो भक्त सच्ची निष्ठा और श्रद्धा से गुरू के बताए मार्ग का अनुसरण करते हैं। उनका जीवन भवसागर से पार हो जाता है। संत पवन सिंधी, संत अमनदीप सिंह, अवतार सिंह शास्त्री और महंत मोहन सिंह ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर गंगा अध्यक्ष नितिन गौतम, कमल गर्ग, महंत दुर्गादास, महंत हर्षवर्द्धन सिंह, महंत मोहन सिंह, महंत तीर्थ सिंह, संत जगजीत सिंह, महंत दर्शन सिंह, महंत श्यामप्रकाश, महंत निर्मल दास, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास सहित अनेक संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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