मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी अखबार की प्रासंगिकता बरकरार: अनिल आत्रेय
अखबार ज्ञान, सूचना और विश्वसनीय समाचारों का सशक्त माध्यम, युवाओं को नियमित अखबार पढ़ने की जरूरत

कलयुग दर्शन (24×7)
मो नदीम (संपादक)
हरिद्वार। इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ते प्रभाव के बावजूद अखबार की प्रासंगिकता आज भी कायम है। समाचारों की विश्वसनीयता और पुष्टि के लिए बड़ी संख्या में लोग आज भी नियमित रूप से अखबार पढ़ते हैं। यह बात आत्रेय न्यूज एजेंसी के स्वामी अनिल आत्रेय ने अखबार के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर सूचना को सत्य नहीं माना जा सकता, जबकि अखबार समाचारों के साथ-साथ संपादकीय, करंट अफेयर्स, विज्ञान, खेल, राजनीति, अर्थव्यवस्था और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए नियमित अखबार पढ़ना विशेष रूप से उपयोगी है। इससे सामान्य ज्ञान बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।

अनिल आत्रेय ने बताया कि वर्ष 1972 से उनकी न्यूज एजेंसी लोगों के घरों तक अखबार पहुंचाने का कार्य कर रही है और अब उनकी तीसरी पीढ़ी भी इस काम से जुड़ी है। मौसम चाहे सर्दी का हो, गर्मी का या बरसात का, अखबार वितरण का सिलसिला नहीं रुकता। उन्होंने बताया कि एक दौर में अखबार 12, 15 और 25 पैसे में मिलता था। वर्ष 1977 में कागज की कमी के चलते सोमवार को अखबार प्रकाशित नहीं होता था। उन्होंने कहा कि आज भी कई पाठक ऐसे हैं, जो पांच दशक से लगातार अखबार पढ़ रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जयकुमार वर्ष 1977 से निरंतर अखबार पढ़ रहे हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ-साथ किताबों, पत्रिकाओं और अखबारों को भी पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की।

अश्वनी शर्मा ने कहा कि अखबारों में अपराध और आत्महत्या जैसी खबरों को प्रमुखता देने के बजाय समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली खबरों को भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूज पेपर का दाम एक तंबाकू की पुड़िया से भी कम है, लेकिन इससे मिलने वाला ज्ञान अमूल्य है। आजादी के आंदोलन में भी अखबारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने चिंता जताई कि सरकारी कार्यालयों, बैंकों और स्कूल-कॉलेजों में अखबार पढ़ने की संख्या घट रही है। अखबार ज्ञान का भंडार होने के साथ मनोरंजन का सबसे सस्ता माध्यम भी है। न्यूज पेपर वेंडर जोगिंदर सिंह ने बताया कि वह करीब 50 वर्षों से लगातार लोगों के घरों तक अखबार पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले परिवारों में चंपक, नंदन, चंदामामा, धर्मयुग और साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी पत्रिकाओं को खूब पढ़ा जाता था, लेकिन अब सुबह उठते ही अधिकांश लोग मोबाइल देखने लगते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी अखबार की अपनी अलग विश्वसनीयता और उपयोगिता है। मोबाइल सूचना दे सकता है, लेकिन अखबार ज्ञान को व्यवस्थित और विश्वसनीय रूप में पाठकों तक पहुंचाने का माध्यम बना हुआ है।



