उत्तराखंड

परमार्थ निकेतन में मां शबरी रामलीला का शुभारंभ

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन, जनजातीय कलाकारों ने दी भावपूर्ण प्रस्तुति

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

ऋषिकेश। मां गंगा के पावन तट स्थित परमार्थ निकेतन में 11 से 15 अक्टूबर तक आयोजित मां शबरी रामलीला का शुभारंभ परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, भारतीय जनता पार्टी पंजाब के सह-प्रभारी एवं भारतीय तीरंदाजी संघ के मानद महासचिव श्री वीरेन्द्र सचदेवा, मां शबरी रामलीला के अध्यक्ष श्री शक्ति बख्शी सहित अन्य अतिथियों और कलाकारों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सैस फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस रामलीला में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं जनजातीय कलाकार संगीतमय नाट्य शैली में रामकथा का मंचन कर रहे हैं। कलाकारों की लोकसंस्कृति, भावपूर्ण अभिनय और संगीत से सजी प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। परमार्थ निकेतन में चौथी बार आयोजित यह महोत्सव भक्ति, सामाजिक समरसता, नारी गरिमा और मानवीय मूल्यों का संदेश दे रहा है। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मां शबरी की भक्ति हमें प्रेम, सेवा, समर्पण और समानता की प्रेरणा देती है। प्रभु श्रीराम ने मां शबरी के प्रेम और निष्कपट भक्ति को स्वीकार कर यह संदेश दिया कि ईश्वर के लिए जाति, वर्ग और सामाजिक पहचान नहीं, बल्कि भक्त के हृदय की पवित्रता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रामकथा के आदर्शों को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन और व्यवहार में भी अपनाना चाहिए। मां शबरी का चरित्र धैर्य, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम का अनुपम उदाहरण है।

वर्षों तक प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा करने वाली मां शबरी की कथा बताती है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से ही जीवन में आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त होती है। उनके प्रेमपूर्वक अर्पित बेर सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और समरसता का शाश्वत संदेश देते हैं। आयोजकों ने बताया कि जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक लोककलाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से रामकथा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम में श्री विश्व मोहन शर्मा, श्री मनोज त्यागी, श्री सुमित कुमार, श्री जितेंद्र चौरसिया और डॉ. मुकेश कुमार का विशेष सहयोग रहा। कलाकार राहुल, हितेश, चंचल, राहुल परिहार और हरमीत सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन में निदेशक डॉ. अनु, चारू सिंह तथा उपनिदेशक श्री प्रवीण का भी विशेष योगदान रहा। परमार्थ निकेतन की ओर से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों से इस आयोजन में शामिल होकर रामलीला का आनंद लेने की अपील की गई है। जो लोग प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, वे परमार्थ निकेतन के आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं।

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