एसी कोच में सीट दिलाने का झांसा देकर मजदूरों से 90,500 रुपये की ठगी, पांच गिरफ्तार
दीपावली पर घर लौट रहे पश्चिम बंगाल के दो मजदूर बने शिकार, जीआरपी ने 30 घंटे में आरोपितों को दबोचा

कलयुग दर्शन (24×7)
सरविन्द्र कुमार (संवाददाता)
हरिद्वार। दीपावली पर अपने बच्चों के पास घर लौटने के लिए दस महीने तक मेहनत-मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ने वाले पश्चिम बंगाल के दो मजदूर ठगी का शिकार हो गए। जनरल टिकट को एसी कोच में बदलवाने का झांसा देकर आरोपितों ने उनसे नकदी, मोबाइल और बैग हड़प लिया। साथ ही उनके बैंक खातों से 90,500 रुपये निकाल लिए। जीआरपी हरिद्वार ने मामले का खुलासा करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ित का वनप्लस मोबाइल और बैग बरामद किया है। वहीं, ठगी की रकम में से 49,999 रुपये बैंक खातों में फ्रीज कराए गए हैं। जीआरपी कप्तान अरुणा भारती ने प्रेसवार्ता में बताया कि 10 अक्टूबर की रात पश्चिम बंगाल के बर्धमान निवासी बिस्वजीत सौरेन और रंजीत कोरा आसनसोल जाने के लिए हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दोनों ने कुंभ एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए जनरल टिकट लिए थे। इसी दौरान दो युवक उनके पास पहुंचे और खुद को रेलवे से जुड़ा बताकर कहा कि उनके मामा टीटी हैं, जो जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच में बदलवा सकते हैं। इसके बाद गिरोह के एक सदस्य को फर्जी टीटी के रूप में पेश किया गया। आरोपितों ने रेलवे के नियमों का हवाला देकर मजदूरों को विश्वास में ले लिया और उनके मोबाइल, पिन कोड, बैग तथा नकदी अपने कब्जे में ले ली। इस दौरान 12 हजार रुपये नकद भी ले लिए। कई घंटे इंतजार करने के बाद जब मजदूरों को सामान की कोई रसीद नहीं मिली तो उन्हें शक हुआ। अगले दिन बैंक से जानकारी करने पर पता चला कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके बाद पीड़ितों ने जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई।

सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र से आरोपितों तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ जीआरपी अनुज के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर बिपिन चंद्र पाठक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र, मैन्युअल पुलिसिंग तथा पीड़ितों द्वारा बताए गए हुलिये और बातचीत के तरीके के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। पुलिस ने करीब 30 घंटे के भीतर हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपित बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़कर फरार होने की फिराक में थे।
महंगे शौक पूरे करने के लिए करते थे ठगी
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ित का 17,300 रुपये कीमत का वनप्लस मोबाइल और बैग बरामद किया है। इसके अलावा बैंक खातों में स्थानांतरित ठगी की रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह रकम पीड़ितों को लौटाने का प्रयास किया जाएगा। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सौरभ मंडल (24), सुमित मंडल (20), किशन कुमार (19), जितेंद्र कुमार चौधरी (24) और बंटी कुमार (20) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों के निवासी हैं। सौरभ मजदूरी, सुमित ऑटो चलाने, किशन सब्जी बेचने और जितेंद्र राजमिस्त्री व टाइल्स लगाने का काम करता था, जबकि बंटी 12वीं पास है।

पुलिस का कहना है कि महंगी बाइक, मोबाइल और अन्य शौक पूरे करने के लालच में आरोपितों ने ठगी का रास्ता अपनाया। पुलिस उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। जीआरपी कप्तान अरुणा भारती ने कहा कि मेहनत की कमाई ठगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस टीम की सराहना करते हुए दीपावली से पहले फ्रीज कराई गई रकम पीड़ितों के खातों में वापस कराने का प्रयास करने की बात कही।



