उत्तराखंड

गंगा तट पर श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीवन भवसागर से पार हो जाता है: स्वामी हरिचेतनानंद

कलयुग दर्शन (24×7)

राकेश वालिया (संवाददाता)

हरिद्वार। कथाव्यास महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि मां गंगा के तट पर श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीवन भवसागर से पार हो जाता है। खड़खड़ी स्थित निर्धन निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज के संयोजन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा परम् कल्याणकारी है। आवश्यकता कथा से मिले ज्ञान को जीवन में आत्मसात करने की है। जो व्यक्ति कथा ज्ञान के अनुसार आचरण करते हैं। उनका जीवन भवसागर से पार हो जाता है। निर्धन निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान का वांगमय स्वरूप है।

कलयुग में भगवान भागवत में ही विद्यमान रहते हैं। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से श्रीमद्भागवत का आयोजन, श्रवण और मनन करते हैं। उनका जीवन आनन्दमय हो जाता है। स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि जन्म-जन्मांतर के पुण्यों का उदय होने पर गंगा तट पर संतों के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का अवसर प्राप्त होता है। कथा का श्रवण कर रहे श्रद्धालु सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें श्रीहरि की कृपा से यह अवसर प्राप्त हुआ है। महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, बाबा हठयोगी, महंत दुर्गादास, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, महंत सूर्यांश मुनि, स्वामी रविदेव शास्त्री, संत जगजीत सिंह, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी शिवानंद भारती आदि संतों ने भी श्रद्धालु भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा के महत्व से अवगत कराया। कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र बंसल और प्रो.रमाकांत पांडेय ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।

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