श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कार सेवा का बिगुल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी का राष्ट्रव्यापी आह्वान, सनातन समाज में उत्साह की लहर
कांवड़ मेले के बाद होगी तिथि घोषित, देशभर के सनातनियों से मथुरा पहुंचने का आह्वान

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। धर्म की राजधानी तीर्थ नगरी हरिद्वार से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के संदर्भ में प्रस्तावित कार सेवा को लेकर संत समाज में नई चर्चा शुरू हो गई है। अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने निरंजनी अखाड़ा के चरण पादुका में कांवड़ियों के लिए चलाएं जा रहे शिविर में बैठक कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कार सेवा आयोजित करने का आह्वान किया है। उनके इस आह्वान के बाद विभिन्न क्षेत्रों से संतों, धार्मिक संगठनों और सनातन अनुयायियों की ओर से समर्थन के संदेश आने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि देशभर से अनेक संत एवं धर्मध्वजा वाहकों ने कार सेवा में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। इसी क्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि जब तिथि घोषित होगी, तब वे अपने श्रद्धालुओं के साथ कार सेवा में शामिल होने का प्रयास करेंगे।

श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि कांवड़ मेले के समापन के तुरंत बाद अखाड़ा परिषद के संतों के साथ विचार-विमर्श कर कार सेवा की तिथि घोषित की जाएगी। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों से इस धार्मिक अभियान में सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश के कोने-कोने से सनातन समाज को एकजुट होकर मथुरा पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार कार सेवा की तिथि घोषित होते ही देशभर के संत, महात्मा और श्रद्धालु मथुरा के लिए प्रस्थान करेंगे। अब संत समाज और श्रद्धालुओं की निगाहें उस तिथि पर टिकी हैं, जिसकी घोषणा कांवड़ मेले के बाद अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इस प्रस्तावित कार सेवा को लेकर धार्मिक जगत में व्यापक चर्चा बनी हुई है। इस मौके पर निरंजनी अखाड़े के सचिव राम रतन गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, राजेंद्र गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी हर्षानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी श्यामदास बापू, स्वामी संदीप खत्री, महंत राज गिरी आदि मौजूद रहे।



