उत्तराखंड

‘संतों का अपमान नहीं सहेगा सनातन समाज’: श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी

पोस्टरों के सामने कटोरे में डाली भीख, कहा धर्म और साधु-संतों की गरिमा से खिलवाड़ अस्वीकार्य

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद परिसर में भगवा वस्त्र धारण कर ‘चंदा चोरी’ के मुद्दे को लेकर किए गए प्रदर्शन के विरोध में धर्मनगरी हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में सांसद पप्पू यादव के पोस्टर जारी किए गए, जिनमें उन्हें भीख मांगते हुए दर्शाया गया। विरोध के दौरान महामंडलेश्वर ललितानन्द गिरि महाराज ने पोस्टर के सामने रखे कटोरे में प्रतीकात्मक रूप से भीख डालकर अपना विरोध प्रकट किया। इस अवसर पर श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु-संतों का वेश धारण कर राजनीतिक प्रदर्शन करना केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण संत समाज, सनातन संस्कृति और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र त्याग, तपस्या, सेवा और राष्ट्रधर्म का प्रतीक है, इसे राजनीतिक व्यंग्य या प्रदर्शन का माध्यम बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सांसद पप्पू यादव सार्वजनिक रूप से संत समाज और सनातन धर्म से क्षमा नहीं मांगते, तब तक अखाड़ा परिषद का विरोध जारी रहेगा।

संत समाज इस विषय पर एकजुट है और धर्म की गरिमा पर किसी भी प्रकार का आघात सहन नहीं किया जाएगा। महामंडलेश्वर ललितानन्द गिरि महाराज ने कहा कि संतों का सम्मान भारत की सनातन परंपरा का आधार है। यदि कोई जनप्रतिनिधि साधु-संतों की वेशभूषा का उपहास करता है या उसे राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाता है, तो उसका लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर विरोध होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस मानसिकता से है जो सनातन परंपराओं का उपहास करती है। विरोध प्रदर्शन के दौरान संतों ने एक स्वर में कहा कि धार्मिक प्रतीकों और संत परंपरा की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का दायित्व है। संत समाज ने सांसद पप्पू यादव से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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