उत्तराखंड

भागवत के प्राण हैं महारास में गाए जाने वाले पंच गीत: स्वामी रविदेव शास्त्री

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राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)

हरिद्वार। रेलवे रोड़ स्थित गरीबदासीय आश्रम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज की सातवीं पुण्यतिथी पर उनकी स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन महारास प्रसंग का श्रवण कराते हुए कथाव्यास स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव सागर से पार हो जाता है और उसे वृंदावन की भक्ति प्राप्त होती है। स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। उन्होंने कहा कि कथा ज्ञान के अनुसार जीवन बिताने से श्रीहरि की कृपा से पुण्य, कल्याण और मोक्ष तीनों स्थितियां सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।

गौ गंगाधाम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी निर्मल दास ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि कलिकाल की वैतरणी श्रीमद्भागत कथा के श्रवण और मनन से सभी इच्छाओं की पूर्ति हो जाती है। स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी शिवम महाराज, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी ज्योर्तिमयानंद ने भी श्रद्धालु भक्तों को संबोधित किया। मुख्य यजमान रश्मि बेन एवं नवीन चन्द्र भट्ट ने व्यासपीठ का पूजन किया और फूलमाला पहनाकर सभी संत महापुरूषों का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर संजय वर्मा, पंडित पदम प्रसाद सुवेदी, लोकनाथ सुवेदी, शेखर वर्मा, आश्रम के ट्रस्टी व श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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