शिव-शक्ति, गंगा महिमा और रुद्राक्ष का बताया आध्यात्मिक महत्व

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
रुड़की। पुरानी तहसील स्थित ज्योतिष गुरुकुलम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को शिव-शक्ति के रहस्य, मां गंगा की महिमा और रुद्राक्ष के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन सुनाया। आचार्य रमेश सेमवाल महाराज ने कहा कि भगवान शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। शिव चेतना के स्वरूप हैं, जबकि शक्ति सृष्टि की मूल ऊर्जा है। शिव-शक्ति की आराधना से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है। उन्होंने मां गंगा के अवतरण और भगवान शिव द्वारा उन्हें अपनी जटाओं में धारण किए जाने की कथा भी सुनाई। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गंगा को पवित्रता, मोक्ष और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना गया है तथा धार्मिक अनुष्ठानों और शिव अभिषेक में गंगाजल का विशेष महत्व है।

रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए आचार्य जी ने कहा कि सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न माना गया है। रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप और ध्यान करने से मन को एकाग्र करने तथा आध्यात्मिक साधना को मजबूत करने में सहायता मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से शिव भक्ति, रुद्राभिषेक, गंगाजल अर्पण और रुद्राक्ष धारण की परंपराओं को श्रद्धा एवं विधि-विधान से अपनाने का आह्वान किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण का श्रवण किया। इस अवसर पर राधा भटनागर, चित्रा गोयल, सुलक्षणा सेमवाल, पूजा वर्मा, रेनू शर्मा, कमलेश धीमान, नीलम सिंघल आदि मौजूद रहे।



