उत्तराखंड

पसमांदा मुस्लिम समाज के सशक्तिकरण पर हुआ मंथन, शिक्षा और रोजगार पर जोर

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

लखनऊ। अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जावेद मलिक के आयोजन में पसमांदा मुस्लिम संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “हालात, समस्या और समाधान” विषय पर पसमांदा समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर गहन मंथन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय, सम्मान, सरकारी योजनाओं की पहुंच और समाज की सक्रिय भागीदारी को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज की समस्याओं को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत है। इस सेमिनार के माध्यम से समाज की समस्याओं और सुझावों को लिखित रूप में सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पसमांदा मुसलमानों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगी।

मानवाधिकार का मूल आधार सम्मान के साथ जीवन, शिक्षा और समान अवसर का अधिकार है। अधिकारों की जानकारी ही उनकी रक्षा का पहला माध्यम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि पसमांदा समाज के विकास की प्राथमिकता शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार होनी चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने समाज से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. शाहिद अख्तर, कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्था ने पसमांदा समाज के भविष्य के लिए शिक्षा को सबसे मजबूत आधार बताया। उन्होंने बेटियों की शिक्षा, उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर दिया।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता तभी है, जब हर वर्ग को विकास में समान भागीदारी मिले। पसमांदा समाज का विकास समान अवसर और सकारात्मक भागीदारी से ही संभव है। महाराष्ट्र सरकार की पसमांदा अध्ययन समिति के अध्यक्ष इदरीश मुल्तानी ने कहा कि अब केवल समस्याएं गिनाने के बजाय तथ्य आधारित अध्ययन और उनके समाधान पर काम करने की आवश्यकता है। पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने शिक्षित समाज, आत्मनिर्भर परिवार, सक्षम युवा और सम्मानजनक भागीदारी का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और पसमांदा समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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