उत्तर प्रदेश

आत्महत्या रोकथाम के लिए खुलकर बातचीत और मदद मांगने पर जोर

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित की जागरूकता गोष्ठी, एएनएम प्रशिक्षणार्थियों ने प्रतियोगिताओं के माध्यम से दिया संदेश

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

सहारनपुर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुरुवार को कैम्प कार्यालय, सहारनपुर में जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शेर सिंह कक्कड़ एवं एनसीडी सेल की नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने किया। गोष्ठी में एएनएम प्रशिक्षणार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने कविता पाठ, भाषण, वाद-विवाद एवं पोस्टर प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2024 से 2026 तक निर्धारित तीन वर्षीय विषय ‘आत्महत्या के बारे में सोच समझ बदलना’ के तहत आयोजित कार्यक्रम का मुख्य संदेश ‘बातचीत शुरू करें’ रहा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शेर सिंह कक्कड़ ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े मिथकों और चुप्पी को दूर कर खुलेपन, सहानुभूति एवं सहयोग की भावना को बढ़ावा देना है। ऐसा वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है, जहां लोग बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मांग सकें। उन्होंने मानसिक तनाव से बचाव तथा समय रहते अपनी समस्याएं दूसरों से साझा करने पर जोर दिया।

इस अवसर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मानसिक तनाव से मुक्त रहने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ भी ली। एनसीडी सेल के वित्त एवं रसद अधिकारी लोहित भारती एवं अंशिका सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने कहा कि आत्महत्या विश्व स्तर पर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके सामाजिक, आर्थिक एवं भावनात्मक दुष्परिणाम दूरगामी होते हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के डॉ. ख्वाजा खयाम ने अवसाद एवं आत्महत्या के विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगातार उदासी, निराशावादी विचार और व्यवहार में बदलाव गंभीर मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को मानसिक तनाव से बचने तथा अपनी समस्याओं को परिवार और मित्रों के साथ साझा करने की सलाह दी। गोष्ठी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुणाल जैन, देवेन्द्र सिंह, सूर्य प्रताप, हरविन्द्र सिंह, प्रीति कन्नौजिया, आबिद, विभा, हिमांशु सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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